बिहार: विधानसभा में पीएम आवास योजना पर घमासान, अवैध वसूली के आरोपों से गरमाया सदन

Bihar: Ruckus in the Assembly over the PM Housing Scheme, allegations of illegal recovery heated up the House.

Bihar Legislative Assembly के बजट सत्र के दौरान Pradhan Mantri Awas Yojana को लेकर सदन में जमकर हंगामा हुआ। भाजपा विधायकों ने ही योजना में गड़बड़ी और लाभुकों से अवैध वसूली के गंभीर आरोप लगाए। एक विधायक ने दावा किया कि जिन लोगों को योजना के तहत स्वीकृति मिल चुकी है, उनसे घर-घर जाकर पैसे वसूले जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस अवैध वसूली का वीडियो भी उनके पास मौजूद है और मामले की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।

रीगा से विधायक Baidhyanath Prasad ने लाभुकों के चयन में कथित गड़बड़ी का मुद्दा उठाते हुए पूछा कि क्या विकास मित्रों की ओर से अनियमितताएं कराई गई हैं। वहीं, बिहारशरीफ के विधायक Sunil Kumar ने कहा कि उनके क्षेत्र में आवास सहायकों द्वारा लाभार्थियों से अवैध वसूली की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि इसका वीडियो प्रमाण भी उपलब्ध है।

गोपालगंज से विधायक Mithilesh Tiwari ने भी आरोप लगाया कि आवास सहायकों द्वारा लाभुकों से 25 प्रतिशत तक राशि वसूली जा रही है। उन्होंने कहा कि एक मामले में 30 हजार रुपये की मांग की गई थी, जिसकी शिकायत उन्होंने जिला प्रशासन से की, लेकिन अब तक संबंधित कर्मी पर कार्रवाई नहीं हुई है।

विधायक सुनील कुमार ने यह भी बताया कि बिहारशरीफ शहर की करीब 60 प्रतिशत भूमि असर्वेक्षित है। उन्होंने कहा कि अशर-विच्छेद भूमि पर पिछले 200 वर्षों से गरीब परिवार बसे हुए हैं, लेकिन नियमों के कारण उन्हें योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इस संबंध में मुख्यमंत्री को पत्र लिखे जाने के बावजूद समाधान नहीं निकला है। उन्होंने सवाल उठाया कि जिन परिवारों के पास 50 वर्षों से अधिक समय से नगर निगम की रसीद है, क्या उन्हें योजना का लाभ मिलेगा? उन्होंने सरकार से स्पष्ट नीति बनाने की मांग की।

झंझारपुर से विधायक Nitish Mishra ने राज्य में योजना के सर्वेक्षण की स्थिति की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सर्वे के बाद दो प्रकार की सूचियां तैयार की गई हैं—‘एक्सेप्टेड’ और ‘डिस्प्यूटेड’। एक्सेप्टेड सूची में उन लाभुकों के नाम हैं जिन्हें केंद्र सरकार के पोर्टल पर स्वीकार किया गया है। जबकि डिस्प्यूटेड सूची में उन पंचायतों के नाम शामिल हैं, जहां जांच के दौरान संख्या में गड़बड़ी पाई गई। उदाहरण के तौर पर एक पंचायत में 1500 नामों में से 700 को सही पाया गया, जबकि 800 नाम विवादित श्रेणी में रखे गए हैं। उन्होंने कहा कि इनकी दोबारा जांच होगी ताकि कोई पात्र लाभार्थी वंचित न रहे।

विभागीय मंत्री Shravan Kumar ने सदन में जवाब देते हुए कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि कोई भी गरीब योजना से वंचित न रहे। उन्होंने बताया कि सूची तैयार कर ली गई है और उसकी जांच प्रक्रिया जारी है। यदि कहीं गड़बड़ी हुई है तो पारदर्शी तरीके से पुनः जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि जो भी आवास सहायक गलत कार्यों में संलिप्त पाए जाएंगे, उन पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

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